Wednesday, 9 January 2019

Experience your life

                             अनुभूति

                         एक बार जब नेपोलियन रशिया पर चढ़ाई कर रहा था। उस वक्त ओ अनजाने से अपने सेना से अलग हो गया। इस दौरान रशियन सैनिक उसे अकेला पाकर उसका पिछा करने लगे। नेपोलियन अकेला होने की वजह से यहाँ वहाँ भागने लगा। भागते हुये वह एक समूर(जानवरों की चमड़ी)बेचनेवाले की दुकान में जा पहुंचा। उस दूकानदार ने उसे एक कोनेमें पड़े समूर के ढ़ेर में छिपाया। लेकिन सैनिकोंने नेपोलियन को उस दुकान में जाते हुए देखनेकी वज़ह से वे सारे सैनिक दुकान में घुस गये। उन्होंने सारी दुकान उथलपुथल कर दी। उन्होंने समूर के ढ़ेरको तक नही छोड़ा। वे अपनी तलवारें उसमे घुसेड़ने लगें। अपने भालोंसे कोचने लगे। इतना कुछ करनेके बावजूद वे लोग नेपोलियन को ढूढ़नेमे नाकामयाब रहे। जल्द ही वे वहाँसे चले गए।
        थोड़ी देर बाद नेपोलियन के सैनिक वहाँ पर आ पहुंचे। जैसे ही  ओ वहां आए, नेपोलियन ढ़ेर में से रेंगता हुवा बाहर आया। दुकानदार यह सब अपनी आँखे बाहर निकाल करही देख रहा था। उसे तो लगा था की, नेपोलियन शायद मरही गया होगा, लेकिन उसे जिंदा पाकर वह तो अचंबित ही रह गया। जैसी ही नेपोलियन बाहर आया, उस दुकानदार ने घबराते हुयेही नेपोलियन से पूछा," मैं आप जैसे महान राजा से माफी मांग कर एक सवाल पूछता हूं की, जब आप उस ढ़ेर के नीचे मौतके बिल्कुल करीब थे तब आपको क्या मेहसूस हो रहा था? आपके मनमें क्या विचार थे?आपको कैसा लग रहा था?"
     यह सब सुनतेही नेपोलियन उसके करीब गया और क्रोधीत होकर बोला,"  मुझसे, राजा नेपोलियन से ऐसा सवाल करनेकी तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?" उसने अपने सैनिकोकि तरफ देखा और बोला," ले आओ इस गुस्ताख़ को बाहर। इसकी आँखोपर पट्टी बाँधो। मैं खुद इसको आग में जलाने की सूचना दूंगा।"
          नेपोलियन के कहनेपर सैनिकोंने उसे दुकान के बाहर निकाला। उसके आँखोपर पट्टी बाँधी और उसे थोड़ी दूरीपर खड़ा किया। दुकानदारकी तो बोलतिही बंध हो चुकी थी। उसे पछतावा हो रहा था। वह दया की भीख मांग रहा था। पर कोई भी उसकी बातको मान नही रहा था। सैनिकोंने उसके ऊपर मिट्टीका तेल डाल दिया। दुकानदार बहुत घबरा गया था। आँखोपर पट्टी होने के कारण उसे कुछभी दिखाई नही दे रहा था। तो उसने अपनी सारी जान कानों में लगाकर अपने इर्दगिर्द हो रहे हलचलों को और आवाजोंकों सुन रहा था। ओ पूरी तरह से बौखला गया था।
            इतनेमें उसके कानोपर नेपोलियन की आवाज़ पड़ी," सैनिको,तैयार हो जाओ ... अपने बाणों का निशाना लगाओ और छोड़ दो." यह सुनतेही दुकानदार के मन,दिमाग और शरीरमें कुछही क्षणोमे मरनेकी भावना निर्माण हुई। वह उस प्रकारकी घबराहट को मेहसूस करने लगा।उसके शरीरमें कंप होने लगा।उसकी आँखोमेसे आँसू बहने लगे। उसका शरीर ठंडा पड़ने लगा।वह अभी मरही गया है ऐसा मनाने लगा और अपनी सांसोकोभी ख़तम हुआ होता जानने लगा। इतना सबकुछ भयंकर उसके साथ हो रहा था,इतनेमें उसने किसी की नजदीक आनेकी आहट सुनी। किसीने झटसे उसके ऑंखोंकी पट्टी खोली। उसने आँखे खोली,देखा तो सामने नेपोलियन खड़ा था। नेपोलियन उसकी आँखोमे गहरा देखकर बोला," तुम्हें तुम्हारे सवाल का जवाब मिल गया होगा?" इतना बोलकर हँसते हुये नेपोलियन वहाँसे निकल गया। दुकानदार को  उसके सवाल का जवाब खाली सुनके नही बल्कि मेहसूस करके मिला था।जवाब की अनुभूति ली थी।
               जिंदगीमें अगर हमे बदलाव लाना है। जीवनके हरएक क्षेत्र में परिवर्तन लाना है तो हमें उसे महसूस करना होंगा। उसका अनुभव करना पड़ेगा। उसे जानना होंगा, क्योकि एक अनुभव ही इंसान को बदल सकता है। कई बार हम सिर्फ किताबें पढ़ते है।लोंगों को सुनते है।यहाँ वहाँ से जानकारी इकट्ठा करते है। यह सब आपके तभी काम आ सकता है अगर आप इसका इस्तेमाल अपनी रोजमर्रा की जिंदगीमें करेंगे। इसका अनुभव करेंगे। अनुभवसेही ज्ञान बढ़ता है, खाली सुननेसे,देखनेसे या फिर बोलनेसे नहीं। आशा है हम सभी अभी से,इसी क्षणसे जीवन मूल्यों को व्यवहारमें लाकर उनका अनुभव लेंगें। जीवन का असली  मज़ा अनुभूतिमे ही है।

Let's experience the life.

Mr. Abhijeet Manav.
       (Mind trainer & NLP practitioner)

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