Sunday, 10 March 2019

FOCUS ON WHAT YOU HAVE


              जो आपके पास है वही सबसे बेहतरीन है।
                       एक राजा अपने राज्यमें बड़ेही प्यारसे,इन्साफसे और दक्षतापूर्ण राज कर रहा था। कई पीढ़ियों से वे वहाँपर राज करते आ रहें थे।वह भी अपनी सभी पूर्वजों की तरह लोगोंमें अपनी होशियारी, उदारता,साहस और न्यायप्रियता के लिये मशहूर था। नगरके सभी लोग उसे अच्छा लगाव रखते थे मगर दुर्भाग्यवश वह एक पैरसे अपाहिच और एक आँख से अंधा था और यह एक बात उसको बहुत खटकती थी। अपने इस रूप को लेकर वह ख़ुदको हमेशा निम्न समझता था।
             एक दिन वह अपने राजमहल के आर्ट गैलरी में जहाँ पर उसके सभी पुर्वजों की तस्वीरें लगाई थी वहाँ पर घूम रहा था। उन सभी सुंदर,आकर्षक और करारी नजरोसे भरी हुई तस्वीरों को देख उसको अपने शरीर के प्रति,अपने रूपसे औरभी घृणा होने लगीं।वह सोंचने लगा,उसके पश्चात जब उसकी तस्वीर वहां पर लगाई जायेंगी तो आनेवाली पीढ़िया उसे देख कितना बुरा महसूस करेंगी। क्या वे उसकी तस्वीर को देख प्रेरित होंगें या नहीं? उसनें वहाँ पर अपनी तस्वीर नही लगानेका फैसला किया। कई सारे लोग कई दिनों तक उसको उसकी तस्वीर लगानेके के लिये अनुरोध कर रहे थे। लोगों के और अपने प्रधानमंत्री के कहने पर वह गैलरी में तसवीर लगाने के लिये तैयार हो गया। लेकिन उसको अपने चित्र के अच्छे बननेपर शंका थी।उसनें राज्य के सभी चित्रकारोको अपना चित्र बनानेका न्यौता दिया। बड़े बड़े चित्रकार भी उसकी तसवीर बनानेका साहस नहीं कर रहें थे।कई दिनों के बाद एक चित्रकार तसवीर बनानेके लिये तैयार हुआ। उसनें राजासे पंद्रह दिन का समय मांगा। यहां सभी लोग राजाकी तसवीर को लेकर उत्साहित थे लेकिन राजा बहुत चिंतित था। वह लगातार अपनी अंधी आंख और अपाहिच पाँव के बारे में सोच रहा था। उसको कभी कभी बदसूरत तसवीर के सपनें भी आते थे। वह बहुतही बैचैन हो गया था।
          पन्द्रह दिन बाद चित्रकार राजा की तसवीर लिये राजमहल में दाखिल हुवा। राजा, उसकी राणी, उसके बेटे बेटियाँ और कई लोग तसवीर देखने के लिये वहाँपर हाजिर थे। राजा को तो उसकी तसवीर देखने का मन ही नही हो रहा था। चित्रकार धीरे धीरे तसवीर से पर्दा  उठाने लगा। तसवीर से पर्दा उठतेही,राजा सहित सभी उपस्थित लोग तसवीर देख हक्काबक्का रह गए। चित्रकारने राजाकी बहुतही सुंदर तसवीर बनायीं थी। तसवीर में राजा हात में धनुष बाण लिए, अपनी एक आँख बंद किये, शिकार पर बाण ताने हुए  आत्मविश्वासपूर्वक घोड़ेपर बैठा था। चित्रकारने राजाकी अच्छी आंख और अच्छे पैर पर ध्यान केंद्रित किया था। राजानेभी इससे पहले कभी भी ख़ुदकी इस तरह कल्पना नहीं की थीं, क्योंकि राजा सिर्फ अपनी कमजोरियों पर यानी कि अपनी अंधी आंख और खोये हुए पाँव पर ही ध्यान दे रहा था। तसवीर ने राजाका खुदकी तरफ देखनेका पूरा नजरिया ही  बदल दिया। वह ख़ुदको अच्छा महसूस करने लगा। वह खुदके जीवनके प्रति औरभी सकारत्मक हो गया।
           हम सभीके साथ कभी कभी या शायद हमेशा ऐसाही होता है की हम राजा की तरह जो हमारे पास नही होता है हम उसपरही ध्यान केंद्रित करते हैं। हमारे पास उपलब्ध सभी स्त्रोतों को नजरअंदाज करके,उनका सही और अधिकतम इस्तेमाल करनेसे चूकते हैं। दूसरों के साथ अपने अनुपलब्धियोंको सामने रख तुलना करते है। यही एक बात हमारे मनमें दुःख, विमनस्कता,नकारत्मकता और खुदकेप्रति न्यूनतम भावना का निर्माण करती है। हम सब को इस क़ायनात ने स्त्रोतोंसे लतपत किया हैं। हमारी जिन्दगीको ऊँचाई पर ले जानेके लिये आवश्यक सभी स्त्रोत कुटकूटकर भरे है। उनको जानना और उनका जीवनकी गतिविधियों में सही उपयोग ही जीवनकी सार्थकता है।

Let's move with what you have.

#AbhijeetManav.

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