Sunday, 28 July 2019

HAVE AN OUTLET


                        प्रवाहित बने
                                       आपने स्कूलमें जरूर मृत समुद्र के बारेमें पढ़ा होगा। दरअसल यह एक नमकीन पानी वाली बड़ी झील है, जिसमे जॉर्डन नदी का पानी मिश्रित होता हैं। इस पानी मे किसी भी प्रकार का जीवन नही है। आमतौर पर पाये जाने वाले समुद्री छोटे या बड़े ऐसे कोईभी जीव यहाँ पर नही है। इसकी क्षारीयता इतनी है कि मानव इसमें बिना दुबे सतह पर ही तैर सकता है। इस प्रकार किसी भी जीवन को यह अनुकूल नहीं है, इसलिए इसको मृत समुद्र कहा जाता है।
   
       इस मृत समुद्र के नजदीक ही उत्तर दिशा में गैलिली नाम का समुद्र है। यह सभी प्रकार के जीवों से सम्पन्न है।इसमें हजारो तरह के जीव है। यहाँपर विविध प्रकारके जलचर और वनस्पति दिखाई देते हैं। विशेष बात यह है कि इसमें भी जॉर्डन नदीका ही पानी मिश्रित होता है।
      मृत समुद्र और गौलिलि समुद्र दोनों एकहि भूभाग में पाये जाते है जहाँपर वातावरण, तापमान और ज़मीन एक समान है। शिवाय दोनोंमें जॉर्डन नदी ही का पानी मिश्रित होता है। फिर भी एक मे जीवन है और एक मे नहीं, ऐसा क्यों?
        गैलिली समुद्र में एक तरफ से आने वाला पानी दूसरी तरफ से बाहर निकल जाता है। प्रवाहित होता है। लेकिन मृत समुद्र में आने वाला पानी किसी भी तरह से बाहर निकलता नही। वह एक ही जगह पर इकट्ठा होता है और धूप की वजह से पानी बाष्पाशीत होकर केवल क्षार पीछे रह जाते है।जो जीवन के लिए प्रतिकूल होता है।
      इन दो समुद्रोंमें पाये जानें वाला फर्क हमे जीवन का एक महान तत्व सिखाता है, की जीवन का अर्थ केवल लेने में नही बल्कि देने में है। जो पाया है उसे प्रवाहित करने में है। जॉर्डन नदी की तरह हमारे जीवनमें कई तरह की अच्छी बातें आते रहती है। अपना परिवार, मित्र या समाज इन सभीसे मिलने वाला प्यार,आदर,मदत या फिर सन्मान यह सब हमे औरो को भी देना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात है ज्ञान की जो केवल बाँटने से ही बढ़ता है।
  चलिए जो कुछ भी अच्छा हमारे पास है उसे बहने दे।

 Let's give the world to receive.

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