Sunday, 28 July 2019

LOVE YOUR WORK

                                                                                              काम से प्रेम करे

                नदी किनारे खड़े पर्बत पर एक छोटासा गाँव बसा हुआ था। गाँव के लोगों का हमेशा पर्बत से नीचे आना जाना रहता था। लेकिन यह काम हर एक के बस का नही था क्योंकि पर्बत बहुत ही ऊँचा था। साथ ही ऊपर और नीचे आने जाने वाले रास्ते बहुत कठिन थे। लोग इस समस्यासे ग्रस्त थे लेकिन उनके पास कोई चारा नही था।
      एक दिन एक इन्सान दोपहर के वक्त कड़ी धूप में उस पर्बत पर चढ़ रहा था। उसके पास एक छोटासा थैला था।उसने कुछ ही अंतर पार किया होंगा की उसको थकान महसूस होने लगीं। वह कुछ देर रुका और फ़िर चढ़ने लगा। थोड़ा और ऊपर चढ़तेहि वह पूरी तरह से थक गया। उसने धीरज छोड़ दिया।वह सोचने लगा,अगर उसके पास वह थैला नही होता तो वह आराम से पर्बत पर पहुँच जाता। उसके मन में उस थैले के प्रति घृणा पैदा होने लगीं। उसका और ऊपर जानें का मन नही हो रहा था।
        वह कभी ऊपर देख रहा था तो कभी नीचे देख रहा था। लेकिन इतनी कड़ी धूप में कोई आने जानें की उम्मीद भी नही थी। थोडीही देर में उसके ध्यान में आया कि कोई तो पर्बत चढ़ रहा था। वह जो कोई भी था बहुत तेजी से औऱ बिना रुके थके पर्बत पर चढ़ रहा था। उसने ध्यान से देखा तो वह एक दस साल की लड़की थी और उसकी बाहोंमे एक चार साल का बच्चा भी था। बड़े आराम से, बिना थके वह लड़की उस बच्चे को लेकर पर्बत चढ़ रही थी। जैसे ही वे दोनों इंसान के पास आये,उसने उन दोनों को रोका और उस लड़की से पूछा," मैं इतनी देर से तुम्हे इतनी आसानी से पर्बत चढ़ते देख रहा हूँ। मैं इस छोटे से थैले को लेकर इतना परेशान हूँ और तुम इस बच्चे को गोद में उठाकर यह ऊंचा पर्बत बिना थके चढ़ रही हो। क्या तुम्हें इस बच्चे का बोझ महसूस नहीं होता?"  उस व्यक्ति के इस सवाल पर वह दस साल की बच्ची थोड़ा गुस्सा होकर ही बोली," आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? यह बच्चा मेरा भाई है और मैं इससे बहुत प्यार करती हूँ। इससे मेरा इतना लगाव है कि यह इससे भी बड़ा होता तब भी मुझे इसका बोझ महसूस नही होता।" इंसान को उस लड़की को बच्चे को उठाकर इतने आराम से पर्बत चढ़ने के कारण समज़ में आया। वह उस लडक़ी का उस बच्चे के प्रति प्यार था जो उसे उसका बोझ कुछ भी नही लग रहा था। उस इंसान को अपने थैले की प्रति इटनासा भी प्यार नही था। इसी वजह से वह थक गया था।
          हमारे साथ भी बिल्कुल ऐसेही होता हैं। जिस काम से आप लगाव नही ऱखते, प्यार नही करते वह काम आप आसानीसे और लंबे वक्त के लिए नही कर सकते। किसी भी काम को उसके अंजाम तक पहुचाना हैं तो उस काम के प्रति प्रेम होना जरूरी है। प्यार से किया हुआ काम मुश्किल नही होता हैं और वह काम पूरा करतें वक्त आने वाली हर मुश्किल आसानी में बदल जाती हैं। काम से प्रेम करने से ही जीवन खुशहाल बनेंगा।
     कई लोगों को तो जीवन भी बोझ लगता है क्योंकि वे जीवन से लगाव नही ऱखते। उन्हें जो मिला है उससे प्यार नही करतें। आपके पास जो कुछ भी उसे प्यार करें। जिंदगी एक सुहाना सफर हो जायेंगी। सारा जीवन हँसते हँसाते गुजर जाएगा।

Let's love whatever we are doing.

7 comments:

  1. Great lesson Sir, that you tought to us through this blog...
    Love your everything ,Love your Life.

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  2. Very true.Work is worship.👌👌

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  3. Very true.Work is worship.Nice blog.👌👌

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  4. Excellent life lesson through this wonderful story. Great sir.

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  5. It's very motivational and inspirational story . It's out standing sir.

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