स्वयं परिवर्तन
शहरका एक नामी बिजनेसमैन अपनी आँखों की बीमारी से हैरान था।कई महीनों से उसकी आंखोमें दर्द था। कई बड़े अस्पतालों में उसने अपना इलाज करवाया था। बड़े बड़े डाक्टरोंसे इलाज करवाके भी वह दर्दसे मुक्त नही हुआ था। दवाईया लें लेकर वह ऊब गया था। उसनें ठीक होनेकी उम्मीद ही छोड़ दी थी।
एक दिन उसके एक मित्रने उसे किसी संन्यासी के बारेमें बताया। वह सन्यासी हिमालय से आया था और वह लोगोंकी असाध्य बीमारियों का इलाज करता था।
बिजनेसमैन तुरंत उसके पास चला गया और उसे अपनी बीमारी के बारे में बताया। सन्यासी ने उसकी पूछताछ की और उसे अजीबोगरीब इलाज बताया। सन्यासी ने कहा की आनेवाले एक सालभर उसे सभी रंगों को टालकर सिर्फ हरे रंग पर ही अपना लक्ष देना पड़ेगा। अगर वह हरा रंग देखता रहेगा तो वह पूरीतरह से दर्दमुक्त होंगा ऐसा उसे बताया गया। वह अमीर बिजनेसमैन बीमारीमुक्त होनेके लिए कुछ भी क़रनेको तैयार था।
उसने घर लौटते ही अपने सेक्रेटरी को बुलाया और दर्जनभर पेंटरोको काम पर लगवाया। बाज़ार से हरे रंग के शेकडो डिब्बे मंगवाए और पूरा घर हरे रंग में रंगवाया। गेट से लेकर किचन तक हर एक चीज़ जो उसे दिखाई देती थी उसने हरे रंग में बदलकर रख दी। जहाँ कही भी नजर पड़ती वहाँ सिर्फ हरा रंग दिखाई देता था।उसने खुद हरे रंग के कपड़े खरीदे साथ ही साथ अपने घरवाले और नौकरों को भी हरे रंग के कपड़े खरीदने पर मजबूर किया। अपने बग़ीचेसे पिले, लाल और अलग रंग के पौधें और फूल सब उखाड दिए और उनकी जगह केवल हरे रंग के पौधें रख दिये। उसके इर्दगिर्द सिर्फ हरा रंग ही दिखाई देता था। उसके सभी दोस्त, रिश्तेदार,पड़ोसी यहाँतक आनेजाने वाले सभी यह देख हैरान हो गए थे, लेकिन वह अमीर बिजनेसमैन ख़ुदको अच्छा महसूस कर रहा था। उसका दर्द अभी कम हो गया था।
तकरीबन दो महीने बाद वह सन्यासी फिर उसी जगह लौट आया। यह बात बिज़नेसमैन को पता लगतेहि उसने अपने सेक्रेटरी को वहाँ भेज सन्यासिको अपने घर बुलवाया। सन्यासी उस सेक्रेटरी के साथ गाड़ीमे बैठ निकल पड़ा। अमीर आदमीके बंगले के बाहर गाड़ी रुकी और जैसेही सन्यासी गाड़ी से उतरा उस वहाँ के वॉचमैन ने उसके हाथोंमें हरे रंग का ड्रेस रख उसे पहनने को कहा। सन्यासी तो हक्काबक्का रह गया। उसने सेक्रेटरी के तरफ देखा और फिर वॉचमेन के तरफ़, तो उन्होंने भी हरे रंग के कपड़ें पहने थे। सन्यासी ने जब पूछताछ की तो उसे पता चला कि यह वहाँ का नियम ही था,की हर एक आनेजाने वालेको सिर्फ हरे रंग का ड्रेस ही पहनना होंगा। सन्यासी कपड़े बदल अंदर चल पड़ा। वह जैसे जैसे आगे बढ़ता गया तब उसे हर एक चीज़ हरे रंग में ही नजर आने लगीं। वहाँ कोई और रंग होनेकी गुंजाइश नहीं थीं। वह घर के भीतर जा पहुंचा,वहाँपर भी सबकुछ हरा था। वह जिस सोफ़े पर बैठा था वह भी हरा था। इतनेमे वह बिजनेसमैन वहाँ उसका स्वागत करने पहुंचा तो वह भी हरे रंग के कपड़े पहनें था। अब तो सन्यासी गहन विचार में पड़ गया। उसनें बड़ी उत्सुकता से बिजनेसमैन को इस हरे रंग के कारनामें के बारे में पूछा तो वह अमीर बोल पड़ा," स्वामी,यह आप ही कि देन हैं। आपहिने मुझे दर्दसे मुक्त होने के लिये लगातार हरे रंग की ओर ध्यान देने के लिए, देखने के लिए कहा था।तबसे मैंने यह सब हरे रंग में बदला है और अभी मैं अच्छा महसूस करता हूं।"
यह सुन सन्यासी बोला," तुम अच्छा महसूस करतें हो यह जानकर मुझे अच्छा लगा। मेरे इलाज का तुम्हे फायदा हुआ यह भी बड़ी बात हैं लेकिन उसके लिए तुम्हे यहाँ सबकुछ हरे रंग में बदलनेकी कोई जरूरत नहीं थीं। अगर तुम्हने अपनी आंखों पर हरे रंग की काँचवाल चश्मा लगाया होता तो भी तुम्हे यह सब हरा दिखाई देता और तभी भी तुम्हे इतनाही अच्छा महसूस होता।"
सन्यासी की यह बात सुन बिजनेसमैन अपनी मूर्खता से परिचित हो, सिर पीटते हुए पछतावा करने लगा।
वास्तविक रूपमें अमीर आदमी की यह गलती हम सभी मे दिखाई पड़ती हैं जब हम ख़ुदको अच्छा महसूस करने के लिये खुदके बजाय औरोमे बदलाव करनेकी अपेक्षा करतें है। कई लोग हमेशा यही मानते आए है कि उनके मानसिक तनाव और उससे निर्मित दर्दभरे जीवन का इलाज दुसरोंको बदलने में हैं। यह सबसे गलत बात हैं।दरसअल हमे हमारा नजरिया बदलना चाहिए। हमे हमारे सोच में बदलाव लाना चाहिए। दूसरोंको बदलनेमे शायद आपकी पूरी जिंदगी गुज़र जाएंगी लेकिन फिर भी आप सुख, शांति,चैन नही पा सकते जब तक आप ख़ुदको नही बदलतें। दूसरोंके बदलनेपर अपने सुखों को निर्भर रखना मूढ़ता ही हो सकती हैं। सही सुकून ख़ुदको बदलनेमे हैं। दूसरोंको बदलने के प्रयास में अपने वक्त की बर्बादी कर पछतावा करनेसे स्वयं परिवर्तन में अपनी ऊर्जा लगाइये। यही दर्दमुक्ति का सही रास्ता है।
Let's change ourselves first...
EXCEL TRAINING SYSTEM.
Mr. Abhijeet Manav
Certified Mind Trainer,
NLP practitioner (NFNLP, U.S.A.)
Life skills coach,
Motivational speaker,
Corporate Trainer.
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