Wednesday, 19 June 2019

CONSCIOUSNESS

                               चेतना 

                         एक साधू गाँवके पासवाले जंगलमें छोटीसी कुटिया में रहता था।गाँव के लोग हररोज़ उसका प्रवचन सुनने जाया करतें थे। लोंगोंको उसकी वाणी अच्छी लगती थीं। एक दिन दो व्यक्ति अद्यात्मिक जीवन से प्रभावित होकर उस साधू के पास गए और उसे अपना शिष्य बनानेके लिए बिनती करने लगें। साधूने दोनों को अगले दिन सुबह जंगलके पासवाली नदी के किनारें पर आनेके लिए कहा। दोनों खुश होकर अपने घर चले गए।
      सुबह होते ही दोनों नदी किनारे पहुँच गए। साधू तो पहलेसेही वहाँपर खड़ा था। दोनों सामने आतेही साधुने अपने दोनों हाथ सामने किये। उसके दोनों हाथोंमें  छोटी छोटी चिड़िया थीं। उसनें उन दोनोंके हाथोंमें एक एक  चिड़िया रखी और कहाँ," अद्यात्मिक राहपर चलने से पहले तुम्हे एक परीक्षा से गुजरना पड़ेगा। तुम्हें इन चिड़ियाओं को जानसे मरना है। लेकिन शर्त यह है कि, तुम्हें इन्हें मारते वक़्त किसीने भी नहीं देखना चाहिए।"
 उन दो व्यक्तियों को अद्यात्मिक जीवनकी इतनी आस लगी थीं कि दोनों बिना सोचें चिड़ियाओं को हाथों में दबोकर जंगल के अंदर चल पड़े। वे दोनों अलग अलग दिशा मे चले गए। वैसे तो था वह घना जंगल लेकिन वहाँपर लोगोका आवागमन हमेशा रहता था। दोनों बड़ी देर तक ऐसी जग़ह ढूँढ़ते रहे जहाँ पर कोई नहीं हो। आखिरकार उनमेंसे एक ने ऐसी जगह पायी। उसने आसपास कोई नहीं पाकर चिड़िया को जान से मार दिया। उसे बहुत ख़ुशी हुई कि, उसनें अद्यात्मिक राह पर चलनेकी परीक्षा पास की थीं। वह ख़ुशीसे साधू के पास लौट आया और मरी हुई चिड़ियाको साधुके हाथमें थमाकर ख़ुदको शिष्य के रूपमें स्वीकार करनेका अनुरोध किया। साधुने उसे दूसरे व्यक्तिके आने तक इंतजार करनेके लिए कहा।दोनों घंटो इंतजार करते रहें। सूरज ढलने लगा था। राह देखते देखते दोनों ऊब गए।
             आखिरकार देर शाम दूसरा व्यक्ति लौट आया। उसने आतेही बड़ेही प्यार से जिंदा  चिड़ियाको साधुके हाथ में दिया। साधुने जिंदा चिड़ियाको देख उस व्यक्तिसे पूछा," तुम्ह इसे जिंदा क्यो वापिस लाये?" व्यक्ति बोलने लगा," मैने पूरा जंगल छान मारा।मैं जंगल के पार होकर कई जग़ह घुमा लेकिन मुझे कोई ऐसी जगह नहीं मिली जहाँ मुझे इसे मारते वक्त कोई देख नही पाता।" उसका दोस्त आश्चर्यचकित होकर उसे पूछने लगा ," ऐसा कैसे हो सकता है?" कोई तो जगह होगी जहाँपर तुम्हे देखनेवाला कोई नही होंगा?"
            इस प्रश्न पर वह बोला," मैंने कई ऐसी जगहें देखी जहाँपर  कोई नही था। उन्हीं जगहों पर जब जब  इस चिड़ियाको मारनेका प्रयास किया तब तब मुझे न जाने कौन रोखता था। मुझे हर वक्त ऐसा लगता था कि कोई तो देख रहा है। मैं ईधर उधर देखता तो कोई नज़र नहीं आता। अंततः मुझे समझ में आया कि कोई और नहीं लेकिन मैं ख़ुदही खुदको चिड़ियाको मारते वक्त देखता था। मुझे मुझमें एक ऐसा इंसान दिखाई देता था जो मुझे देखता था। मुझमें दो इन्सान थे एक मारने वाला और दूसरा उसे देखने वाला जो मुझे ऐसा काम करनेसे रोखता था और वह कोई और नही मेरी चेतना (Consciousness) थी। मैं दुनियामें कहीं भी जाता तो मेरी चेतना मेरे साथ होती और मेरी चेतना मुझे ऐसा गुनाह कभी भी नहीं करने देती। उस चेतनाने मुझमे इस चिड़िया के प्रति दया भाव पैदा किया। इसके साथ कुछ गलत करने का मतलब मुझे खुदके साथ गलत करनेका एहसास होने लगा,तो मैं इसे जिंदा  वापिस लाया।"
                व्यक्ति के इस जवाब से साधू प्रभावित होकर बोला," सही कहा तुमनें इस पूरे ब्रम्हांड में कोई भी बुरा काम छुपकर किया नही जा सकता क्योंकि हर वक्त अपनी चेतना हमे देखती रहती है। जो इस चेतना को पहचान सकता है वही अद्यात्मिक जीवन की राह पर चल सकता है। तुम्हहिं मेरे शिष्य बनने के लायक हो।"
                जिन्दगी में न जाने कितने ऐसे काम दुनियासे छुपकर हम करते रहते हैं जो हमे नही करने चाहिए।हमें अक्सर ऐसा लगता है कि कोई और कभीभी इसके बारेमें नही जानेंगे लेकिन हम भूल जाते है कि हम खुद उस गलत काम को देख रहे है। हम उन बुरी मनोदशाओं से इतना प्रभावित होते हैं कि हमारी चेतना कमजोर हो जाती है।हम उसे भूलकर गलत काम करते रहते है। लोगोंके प्रति बुरी भावना रखना, परिवार और समाज के पीठ पीछे होनेवाले दुष्कर्म, लोंगोंको फसाना, भ्रष्टाचार जैसीे ग़लत बातें, पीठ पीछे बाते करना, एकदूसरे के बारेमें भड़काना न जाने ऐसे कितने कर्म हम करतें हैं और हमे लगता रहता है कि कोई नही देख रहा है। यह बिल्कुल गलत है। किसी और कि क्या जरूरत होती है।यह सब गलत बातें हम खुद देखते है। दरअसल यह सब गलतीसे नही होता है। हमनेही इसका चुनाव किया हुआ होता हैं। जिसकी चेतना जाग्रत रहेगी वही समझेगा।
          Being  angry is not a   mistake,
    It is a choice.
          Being envious is not a mistake,
    It is a choice.
          Being resentful is not a mistake,
    It is a choice.
         Being jealous is not a mistake,
    It is a choice.
         Being immoral is not a mistake,
    It is a choice.
         Being abusive is not a mistake,
    It is a choice.
         Being adulterous is not a mistake,
    It is a choice.
         Being killer is not a mistake,
    It is a choice.
         Being demotivator is not a mistake,
   It is a choice.
         Being corrupt is not a mistake,
   It is a choice.
         Being dishonest is not a mistake,
   It is a choice.

    हमेशा ध्यान रहे कि आप ख़ुदको देखते है। अगर आपकी चेतना जागृत रहेंगी तो आप सही चुनाव करेंगे। गलतीसे भी गलती नही करेंगें।

Let's be in consciousness.....

EXCEL TRAINING SYSTEM. 

Mr. Abhijeet Manav
Certified Mind Trainer, 
NLP practitioner (NFNLP, U.S.A.)
Life skills coach,
Motivational speaker,
Corporate Trainer.

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