Monday, 11 February 2019

VALUE OF THE LIFE

                             जीवन का मूल्य
                       एक युवक और उसके पिता सुबह बग़ीचेमे टहल रहे थे।दोनों जीवन के बारे में बात कर रहें थे,तो युवकने अपने पितासे एक सवाल पूछा," पापा, मेरे जीवन का मूल्य क्या है?" इस सवाल पर बीना कुछ कहे पिताजी उसको घर ले गये और उसके हाथ मे एक छोटा पत्थर थमाकर बोले,"इस पत्थर को बाजारमें लेके जाओ और बेचनेके लिये रखो। किसीकोभी इसकी क़ीमत तब तक नहीं बताना जबतक कोई ना पूछे। और जब कोई क़ीमत पूछे तो अपनी सिर्फ दो ऊँगलीया दिखाना। जो भी क़ीमत हो उसे सुनकर पत्थर लेकर वापिस लौट आओ।"
                  युवक को अपना सवाल और इस पत्थरके बेचने का कोई संबंध नज़र नहीं आ रहा था।फिर भी पिता की बात सुन युवक झट से नजदीकी मार्केट में चला गया।पत्थर को सामने रख ख़रीदार की राह देखने लगा। कुछ ही समयमे एक आदमी उसके सामने खड़ा हुवा। वह अपने बच्चों को खेलने के लिए कुछ खरीदना चाहता था।उसे पत्थर पसंद आया था। उसने युवक को पत्थरकी क़ीमत पूछि तो युवक ने अपनी दो उंगलियां दिखाई। आदमी बड़ी ख़ुशीसे बोला," मैं इस पत्थरके दो रुपये दूँगा।" युवक दौड़ता हुआ पिता के पास गया और उनकों सबकुछ बताया। पिताने उसे वही पत्थर लेकर म्यूजियम में ले जानेको कहा। युवकने म्यूजियम अफसरके सामने पत्थर रखा। उसने पत्थरको देखा और क़ीमत पूँछी। युवकने फिरसे दो उंगलियां दिखाई इसपर अफ़सर बोला,"मैं ईसके दो सौ रुपये दूँगा।" लड़का फिर घर अपने पिताके पास आया और सबकुछ बताया।
                पिताने उसे उसी क्षण हिरे जेवरात के दुकानमें जाने की सूचना दी। लड़का बड़ेही उत्साह से दुकान में गया और दुकानदार को वह पत्थर दिखाया। उस पत्थर को देखतेही दुकानदार चकित होकर बोला," यह पत्थर तुम्हे कहा मिला? यह तो अतिदुर्लभ है। यह बहुतही मूल्यवान है। अगर तुम इसे बेचना चाहो तो कितना दाम लोंगे?" इस सवाल पर युवकने फ़िर एक बार अपनी दो उंगलियां दिखाई। दुकानदार तत्काल बोला," मैं इसके दो लाख रूपये दूँगा।" यह सुनकर युवकके तो होश उड़ गए। वह अचंभित होकर घर आया और पिताको इस घटनाके बारे में बताया। सब सुनकर पिता बोले," क्या तुम्हें तुम्हारे जीवन का मूल्य मालूम हुआ?"
                   पिताजी आगे बोलते रहे," तुम्हारा वंश,विशेषज्ञता,रंग,नाम या फिर पैसा किसी भी काम का नही जब तक तुम्हे इस दुनियामें तुम्हारी जगह पता नही होती। यह निर्भर होता हैं तुम्हारे खुदके तरफ होनेवाले नज़रिये पर। तुम खुद को क्या समझते हो इसपर।तुम्हारे खुदपर होनेवाले भरोसेपर। तुम्हे तो खुदही तुम्हारा मूल्य तय करना पड़ेगा। यह तो तुम्हारे आस पास के लोग होते है,जो तुम्हारा मूल्य दो रुपये भी लगायेंगे और दो लाख भी।"
          इस कहानी से दो बातें स्पष्ट होती हैं। एक तो हमारे जीवन का मूल्य हमे ख़ुदको तय करना होंगा। लोग जो उनका मन बोले वह मूल्य लगायेंगे। यह उनकी निजी राय होती है।जो निर्भर होती है उनका अनुभव,दृष्टिकोण,ज्ञान, योग्यता और सबसे महत्वपूर्ण हैं उनकी औक़ात।
         दूसरी बात यह है कि हमे हमेशा वही लोगों के बीच रहना चाहिए जो आपका मूल्य सही मायने में पहचान सकें। हमे ऐसे मित्र बनाने चाहिए जो आपको हमेशा हिरे जेवरात की तरह अमूल्य होनेका एहसास दे सकें।

Let's choose the people around you wisely.

#Mr.Abhijeet Manav.
(Mind Trainer & NLP Master Trainer)

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