Sunday, 24 February 2019

CHOOSE RIGHT WORDS

                       
                              सही शब्द चुनें
             राजीव एक बहुतही अच्छा इंसान था। वह हर एक के काम आता था। उसके शहरमें शायद ही कोई ऐसा होगा जो उसके अच्छे बर्तावसे से अनजाना होगा। सारे लोग उसे प्यार करते थे।उसका आदर सन्मान करते थे। जैसे उसके चाहने वाले थे वैसेही उसके कुछ विरोधी भी थे,गोपाल उनमेंसे एक था। गोपाल को राजीव की एक भी बात अच्छी नहीं लगती थी।वह उससे ईर्ष्या करता था। राजीव की लोकप्रियता बढ़ रही थी। गोपाल ख़ुद को राजीव के मुकाबले कम महसूस करने लगा था। उसकी ईर्ष्या और द्वेष इतना बढ़ गया कि वह अब राजीव की बुराई करने लगा था। जो उसके मन में था वह बाहर आने लगा। वह अब खुलेआम लोगोंके बीच राजीव के बारेमें अनापशनाप बोलने लगा। वह राजीव के बारेमें अफवाएं फ़ैलाने लगा। हर एक के पास जाकर उसके चरित्र और व्यवहार के बारेमें असम्बद्ध बातें करने लगा। कुछही दिनोंमें गोपालने पूरे शहरमें राजीव का नाम बुराईयों से जोड़ दिया था। उसकी कही हुई बातोंको कुछ लोग सच भी मानने लगे थे।
         गोपाल की यह बातें राजीव को सहन नही हो रही थी, तो उसने गोपाल के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज किया। जब बात कोर्ट में गयी तो गोपाल घबरा गया। उसने पहले तो अपने ऊपर लगाएं इल्ज़ाम झुटे है ऐसा कहना सुरु किया। लेकिन जब लोगों ने जवाब दिए तो उसने अपना जुर्म कबुल किया। और माफी माँगने लगा।वह कहने लगा कि वे सिर्फ टिप्पणियां थी,उसको लोगों ने इतना गंभीर नही लेना चाहिए था।जज ने गोपाल को सज़ा देने की ठान ली,लेकिन सजा उसको दूसरे दिन सुनाई जानी थी। तब तक जज ने उसको कोरे कागज़ पे राजीव के बारेमें जो कुछ भी कहा था वह सब लिखनेको कहा और घर जाते वक्त उन्ही कागजोको रास्तेमें फेंकनेके लिये कहाँ। गोपालनेभी वैसेही किया लिखे हुए कागज रास्तेपर यहाँ वहां फेंके और घर चला गया।
                     दूसरे दिन गोपाल जज के सामने सजा सुनने के लिए हाजिर हुआ। जज साहबने सजा सुनाने से पहले गोपाल को कल रास्तेमें फेंके हुए कागज उठाकर लाने के लिए कहा। गोपाल तो हड़बड़ा गया यह कैसे हो सकता था। उसने कहाँ,"अभी तो वही कागज वापस लाना असंभव हैं। वे तो अभी हवा के साथ पूरे शहर में यहाँ वहां फैल गए होंगें।" इसपर जज साहब बोले,"जिस तरह तुम कल फेंके हुए कागज नहीं वापिस ला सकतें उसी तरह राजीव के बारेमें कहे बुरे शब्द भी तुम वापिस नहीं ला सकतें।चाहें तुम किसीभी सजाके लिए तैयार क्यों ना हो।" गोपाल गर्दन झुकाये शर्मिंदगी से अपने आपको कोसता रह गया।
                   हम कभी कभी जाने अनजाने में लोगों के बारेमें बिना सोचे समझे, सच की खोज किये बिना ऐसेही बातें करतें हैं। अफवाये फैलाते हैं, जो कई दफा लोगोंकी जिंदगी भर कमाई हुई इज्जत,मान सन्मान, पहचान को खत्म कर देती हैं। हमें जानभुज कर ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए। अगर हम किसीके बारेमें अच्छा नहीं बोल सकते तो भी सही है लेकिन लोगोंकी बुराई नहीं करनी चाहिए।चलते वक्त अगर पैर फिसल जाए तो अपने आपको संतुलित किया जा सकता है लेकिन अगर ज़बान फिसले तो आप शब्दों को नहीं संभल सकतें। उन्हें पूरी सजगता के साथ,सोच समझकर इस्तेमालमें लाना पड़ेगा।

Let's control your tongue for the better use of it.

Mr. Abhijeet Manav.
( Mind Trainer & NLP Master Trainer)

Monday, 11 February 2019

VALUE OF THE LIFE

                             जीवन का मूल्य
                       एक युवक और उसके पिता सुबह बग़ीचेमे टहल रहे थे।दोनों जीवन के बारे में बात कर रहें थे,तो युवकने अपने पितासे एक सवाल पूछा," पापा, मेरे जीवन का मूल्य क्या है?" इस सवाल पर बीना कुछ कहे पिताजी उसको घर ले गये और उसके हाथ मे एक छोटा पत्थर थमाकर बोले,"इस पत्थर को बाजारमें लेके जाओ और बेचनेके लिये रखो। किसीकोभी इसकी क़ीमत तब तक नहीं बताना जबतक कोई ना पूछे। और जब कोई क़ीमत पूछे तो अपनी सिर्फ दो ऊँगलीया दिखाना। जो भी क़ीमत हो उसे सुनकर पत्थर लेकर वापिस लौट आओ।"
                  युवक को अपना सवाल और इस पत्थरके बेचने का कोई संबंध नज़र नहीं आ रहा था।फिर भी पिता की बात सुन युवक झट से नजदीकी मार्केट में चला गया।पत्थर को सामने रख ख़रीदार की राह देखने लगा। कुछ ही समयमे एक आदमी उसके सामने खड़ा हुवा। वह अपने बच्चों को खेलने के लिए कुछ खरीदना चाहता था।उसे पत्थर पसंद आया था। उसने युवक को पत्थरकी क़ीमत पूछि तो युवक ने अपनी दो उंगलियां दिखाई। आदमी बड़ी ख़ुशीसे बोला," मैं इस पत्थरके दो रुपये दूँगा।" युवक दौड़ता हुआ पिता के पास गया और उनकों सबकुछ बताया। पिताने उसे वही पत्थर लेकर म्यूजियम में ले जानेको कहा। युवकने म्यूजियम अफसरके सामने पत्थर रखा। उसने पत्थरको देखा और क़ीमत पूँछी। युवकने फिरसे दो उंगलियां दिखाई इसपर अफ़सर बोला,"मैं ईसके दो सौ रुपये दूँगा।" लड़का फिर घर अपने पिताके पास आया और सबकुछ बताया।
                पिताने उसे उसी क्षण हिरे जेवरात के दुकानमें जाने की सूचना दी। लड़का बड़ेही उत्साह से दुकान में गया और दुकानदार को वह पत्थर दिखाया। उस पत्थर को देखतेही दुकानदार चकित होकर बोला," यह पत्थर तुम्हे कहा मिला? यह तो अतिदुर्लभ है। यह बहुतही मूल्यवान है। अगर तुम इसे बेचना चाहो तो कितना दाम लोंगे?" इस सवाल पर युवकने फ़िर एक बार अपनी दो उंगलियां दिखाई। दुकानदार तत्काल बोला," मैं इसके दो लाख रूपये दूँगा।" यह सुनकर युवकके तो होश उड़ गए। वह अचंभित होकर घर आया और पिताको इस घटनाके बारे में बताया। सब सुनकर पिता बोले," क्या तुम्हें तुम्हारे जीवन का मूल्य मालूम हुआ?"
                   पिताजी आगे बोलते रहे," तुम्हारा वंश,विशेषज्ञता,रंग,नाम या फिर पैसा किसी भी काम का नही जब तक तुम्हे इस दुनियामें तुम्हारी जगह पता नही होती। यह निर्भर होता हैं तुम्हारे खुदके तरफ होनेवाले नज़रिये पर। तुम खुद को क्या समझते हो इसपर।तुम्हारे खुदपर होनेवाले भरोसेपर। तुम्हे तो खुदही तुम्हारा मूल्य तय करना पड़ेगा। यह तो तुम्हारे आस पास के लोग होते है,जो तुम्हारा मूल्य दो रुपये भी लगायेंगे और दो लाख भी।"
          इस कहानी से दो बातें स्पष्ट होती हैं। एक तो हमारे जीवन का मूल्य हमे ख़ुदको तय करना होंगा। लोग जो उनका मन बोले वह मूल्य लगायेंगे। यह उनकी निजी राय होती है।जो निर्भर होती है उनका अनुभव,दृष्टिकोण,ज्ञान, योग्यता और सबसे महत्वपूर्ण हैं उनकी औक़ात।
         दूसरी बात यह है कि हमे हमेशा वही लोगों के बीच रहना चाहिए जो आपका मूल्य सही मायने में पहचान सकें। हमे ऐसे मित्र बनाने चाहिए जो आपको हमेशा हिरे जेवरात की तरह अमूल्य होनेका एहसास दे सकें।

Let's choose the people around you wisely.

#Mr.Abhijeet Manav.
(Mind Trainer & NLP Master Trainer)

Sunday, 3 February 2019

BE UNIQUE

                           
                              अद्वितीय

                          एक दिन सुबह एक कुलीन और साहसी सामुराई झेन मंदिर में प्रवेशित हुआ। वह वहाँके झेन साधुको मिलना चाहता था। वैसे तो उसका वहाँपर हमेशा आनाजाना था। झेन साधु कुछ छात्रोंके साथ बातचीत कर रहे थे। जैसेही उनका ध्यान सामुराई पर पड़ा,उन्होंने उसको पास बुलाया।पास जाकर उस साधुको प्रणाम करके सामुराई बोला," मैं जबभी आपको देखता हूँ, मेरे मन मे खुदके प्रति हीनता का भाव जागृत होता है।मैंने आजतक कितनों को हराया है। कई बार मौतका सामना किया हैं।पर, मैं जब आपको ध्यान करते हुए देखता हूँ तो मेरा जीवन किसी काम का नहीं ऐसा प्रतीत होता हैं। ऐसा क्यों?" इसपर झेन साधु मुस्कुराये और बोले," थोड़ा धीरज रखों, मैं एक बार मुज़से मिलने आये सभी लोगों को मिलता हू और उसके पश्चात तुम्हारे सवाल का जवाब देता हू।"
               सामुराई वहीं उस झेन साधुके पास बैठ गया। दिनभर बहुत सारे लोग आते जाते रहे।साधु हरएक को सलाह देता था।शाम होंनेका समय आया था फिरभी लोग आ रहे थे। इतने लोगों के साथ बात करनेके बावजूद भी सामुराई को साधु के चेहरेपर उतनाही उत्साह दिख रहा था जितना सुबह था। सूरज ढल चुका था। शाम हो गयी थी। लोगों का आना जब थम गया तब सामुराई साधुके पास गया और फिरसे जवाब देनिकी बात की। झेन साधु सामुराई को लेकर आपने कमरेमें चले गए। दोनों खिडकीके पास खड़े हो गए। साधुने आसमान की ओर अंगुली उठाई और बोले," देखों इस पूनम के चाँद को किस तरह अँधेरेको चीरता हुआ रोशनी फैला रहा है। यह पूरी रातभर इसी तरह सृष्टिको उजाला देगा। फिर सुबह होंगी सूरज निकलेगा। सूरज के रोशनी में सबकुछ साफ़ साफ़ दिखाई देगा। यह धरती , आसमान,पर्बत, पेड़ पत्ते सबकुछ वैसे के वैसे नजर आयेंगे जैसे वे अभी नहीं दिख रहे है। तो क्या कभी चाँदको सूरज को देखकर,उसके निखार को देखकर उसके जैसा प्रकाशमान नही होने पर क्या खुदके प्रति हीनता का भाव मेंहसूस करना चाहिये?" सामुराई बोला," नही, बिल्कुल नहीं क्योंकि दोनोंमें कोईभी ईर्षा नही हो सकती। हर एक का अपना सौंदर्य है।सृष्टि में दोनों का महत्व अपनी अपनी जगह हैं। इन दोनोंका होना हरएक जीव को एकसमान प्रभावित करता हैं।"
      साधुने हसकर सामुराई के तरफ देखा और कहा," यही तुम्हारे सवाल का जवाब है।हम दोनो भी एक समान है। बस अपनी अपनी धारणाओसे जीवन बिता रहे हैं और इस दुनियाको औरभी खूबसूरत बनानेका प्रयास कर रहे हैं।" सामुराई अब हिनताके भावसे उठकर समानता के भाव मे रूपांतरित हो गया था। साधु को उसी भावमें प्रणाम करके मंदिरसे बाहर निकला।
        हम जाने अनजाने में खुदकी औरों के साथ तुलना करते रहते हैं और कभी ख़ुदको हीन मानते हैं या फिर कभी औरोको हीन समझते हैं। यहाँ का हर एक जीव अद्वितीय हैं।अनूठा हैं। हर एक के भीतर समानरूपसे उर्जाका वहन होता हैं। ना कोई कम है ना ज्यादा। हर एक समान हैं। औरोके साथ तुलना किये बिना,हमारे अंदर पड़े स्त्रोतोका सही उपयोग करकेहि हम इस दुनियाको और भी खूबसूरत बना सकते हैं।
 
Let's be unique....

#AbhijeetManav.

Beyond Habits: The Power of an Identity Shift

  Beyond Habits: The Power of an Identity Shift Most people approach change backward. They say, "If I go to the gym every day (Action),...