ज़हर
नेहाकी शादी एक बड़े घर मे हुई थी। उसके घरमें तिनही लोग थे,वह, उसका पती और उसकी सास। उसके पतीका कारोबार था।घरमें सब सुख सुविधाएं थी। शुरूमे सबकुछ अच्छा चल रहा था लेकिन धीरे धीरे सास बहुमे अनबन होने लगी। नेहा एक नये जमानेकी लड़की थी, लेकिन सास थोड़ीसी पुराने ख़यालोंकी थीं।कई बातोंको लेकर उन दोनोंमें हमेशा तनाव रहता था। इस पूरे मामले में नहाके पती की बहुत बुरी हालत होती थीं। इन दोनोंके रोज़ रोज़ के झगड़े से बेचारा ऊब गया था। उसने धीरे धीरे घर की तरफ और नेहा की ओर भी ध्यान देना छोड़ दिया। घर मे हो रहे इन सभी बातोंको, नेहा उसकी सास को जिम्मेदार मानती थी। अब नेहा इतनी परेशान हो चुकी थीं कि उसने अपनी सास को जानसे मारनेका ईरादा किया।
इसी इरादेसे वह एकदिन अपने डॉक्टर चाचा से मिलने गई। वे आयुर्वेदिक इलाज करनेमें माहिर थे।नेहा ने उनकों सबकुछ बताया और उनसे ज़हर की माँग की। नेहा की बातों से चाचा सबकुछ समझ गए थे। उन्होंने नेहा को ज़हर के लिए हां कहा लेकिन उन्होंने नेहा को अपनी सासके साथ अच्छा बर्ताव करनेके लिए भी कहा,उसका हर कहाँ मानने को कहा ताकि किसीको शक ना हो। उसको तो कुछदिनोंके लिये ही अच्छा बर्ताव करना था, तो उसनेभी ख़ुशीसे चाचा की बात मान ली। चाचाने उसके हात में कुछ जड़ी बूटियाँ थमा दी और उनकों रोज़ थोड़ा थोड़ा खानेमें मिलानेको कहाँ।
जैसे ही नेहा अपने घर आयी उसका नूर बदल गया था। अपनी सास के साथ वह अच्छा बर्ताव करने लगी, उसकी हर बात मानने लगी,उसे अच्छा खाना पकाकर खिलाने लगी,उसकी सेवा करने लगी।धीरे धीरे उसकी सास भी उसके साथ अच्छा बोलने लगी,उसका ख्याल रखने लगी। जैसे जैसे दिन बीतने लगें दोनोंमें प्यार बढ़ता गया।घरमें शांती का माहौल तैयार होने लगा। अब तो उसकी सास हरएक के सामने अपनी बहुके गुणगान गाने लगी। और तो और दोनों में माँ बेटी जैसा रिश्ता तैयार होने लगा। सास बहू में और पूरे घरमें हुए बदलाव को देखकर नेहा का पती भी उनके साथ हसी ख़ुशीसे पेश आने लगा। सब अच्छा हो गया था लेकिन अब नेहा के मन मे खलबली होने लगी। वह आज तक सास के खानेमें ज़हर मिलाते आयी थी। सासमे हुए बदलाव से और दोनों में बढ़ते लगाव के कारण नेहा को उसके किये का पछतावा हो रहा था। अब वह अपनी सास की लंबी उम्र चाहती थी। उसने अब तो खाने में ज़हर घोलना बंद किया था लेकिन उससे पहले तो उसने ढ़ेर सारा जहर मिलाया था।अब वह बेचैन होने लगीं। उसी बेचैनी के साथ वह फिर एक बार आपने डॉक्टर चाचा के पास गयी। उनकों सब बदलावोके बारेमें बताया और उस ज़हर का असर कम होने के लिए और सास की तबियत अच्छी होनेके लिये दवाई माँगने लगी। चाचा जोर जोर से हँसने लगें। नेहा तो हैरान हो गयी। उसने उनकों हँसने की वज़ह पूछी तो चाचा बोले," मैंने तुम्हें ज़हर दिया ही नहीं था। वे तो सेहत अच्छी करनेवाली दवाईया थीं। ज़हर तो तुम्हारे मन मे था। तुम्हारा गुस्सा,चिड़चिड़ापन, द्वेष, अहंकार यह सब ज़हर ही था,जो अब पूरी तरह से उतर गया है। अब तुम्हारा मन साफ़ हो गया है। अब तुम्हे किसीभी दवाई की जरूरत नहीं है।" यह सुनकर नेहा बहुत खुश हुई। आपने चाचा का आभार मानकर वह हँसते हुये, मन में ढ़ेर सारा प्यार भरकर आपने घर चली गयी।
कई बार हम हमारे मन में अहंकार,द्वेष, गुस्सा आदि किन किन तरह के जहर को पैदा करते रहते है। उनकों बाहर निकाले बिना हम औरो के साथ अच्छा व्यवहार नही कर सकतें। दूसरों में बदलाव लाने के लिये हमें ख़ुदमे बदलाव करना चाहिए।
Let's clean our minds from the poisonous thoughts.
Mr. Abhijeet Manav.