हारने की हिम्मत
एक युवक अपनी बरसों पुरानी बीमारिसे बहुत चिंतित था। वह कहीं अस्पतालों में जाकर ख़ाली हाथ लौटा था। हर एक डॉक्टर ने बताया था कि वह अपनी बीमारिसे कभी भी मुक्त नहीं हो सकता और जल्द ही वह दुनियाको छोड़ कर जाने वाला हैं। उसने अपनी ज़िंदगी का अंतिम सत्य जान लिया था। उसने जीने की आशा छोड़ दी थी। उसने अपनी जल्द ही आनेवाली मौत का स्वीकार किया था। धीरे धीरे मौत का डर ख़तम हुआ था।
इसी बीच उसके देश के और पड़ोसी देश के बीच घमासान युद्ध चल रहा था। सरकार युवाओंको युद्धके लिए सैन्य बलों में भर्ती होने का आवाहन कर रही थी। उस युवक ने सोचा कि वह वैसेही मरने वाला था तो क्यों ना युद्ध मे हिस्सा लेकर देश के लिए ही जान दे। इस सोच के साथ वह सैनिक बन गया। घमासान युद्ध हो रहा था। वह युवक पूरे मन से लड़ रहा था। वह तो हमेशा फ्रंट लाईन पर होता था। कितनीं भी मुश्किल जगहों पर चढ़ाई कर रहा था। उसने मौत के डर को ही हराया था। उसने अपनी पूरी ताक़द लगाई थी। अपने अंदर के शौर्य और वीरता का वह सही इस्तेमाल कर रहा था। उसका यह रूप देख कर तो कर्नल भी हैरान था। कर्नल उसके साहस से प्रेरित हुआ था। कुछ ही दिनों में युद्ध समाप्त हुआ। युवक के देश ने विजय हासिल किया था और इसमें युवक का बड़ा हिस्सा था। कर्नल ने युवक का नाम शौर्य क़िताब के लिये घोषित किया।
पुरस्कार समारोह के दिन युवक कर्नल से मिला और अपनी बीमारी के बारेमें बताया। साथ ही वह जल्द ही मरने वाला था इसका ज़िक्र किया। कर्नल को वह सब सुन बहुत बुरा लगा और उसने इस तरह के जाँबाज़ सिपाही को किसी भी तरह बचाने का फैसला किया। उसने बड़े बड़े डाक्टरों से युवक का इलाज करवाया। उसका पूरा ख़र्चा सैन्य दल ने उठाया। जल्द ही युवक ठीक हो गया। वह बरसों पुरानी बीमारिसे मुक्त हुआ। वह खुश था। थोड़ेही दिनोंमें ठीक होकर वह फिरसे सैन्य दल में शामिल हुआ।
लेकिन बीमारिसे मुक्त होने के पश्चात, तबियत बिल्कुल ठीक होने का बाद वह युवक किसी भी युद्ध मे फ्रंट लाईन पर नही लड़ा। वह हमेशा दूसरों के पीछे रहक़र ही लड़ रहा था। वह किसी भी तरह ख़ुद को पीछे ही रखता था। वह जिंदगी में कभी भी आगे नही गया,क्योकि उसे मौत का डर लग रहा था। इस डर ने एक वीर को कायर बनाया था।
हममें से कइयों के साथ ऐसा ही होता हैं। कई तरह के डर हम वीरों को कायर बनाते हैं। उनमें से एक है असफ़ल होने का डर (Fear Of Failure)। इस डर ने हमारे अंदर के वीर,साहसी,पराक्रमी और चक्रवर्ती सम्राटों को डर का गुलाम बनाया हैं। जो कुछ चाहतें है वह सब पाने की हैसीयत होनेपर भी इस असफलता के डर ने हमारी औक़ात बड़ा शून्य बनाई है। यह डर हमें हमेशा नया कुछ करने से रोकता है। हमें सपनें देखनेसे रोकता हैं। इसने आपकी अंदर की सकारात्मक सोच और ऊर्जा को रोख रखा है। जीवन के बड़े बड़े सुखों से दूर किया हैं। नजाने कितने अरमानों का आपने ख़ुद गला घोंटा हैं। इस डर के वजह से तो कइयों ने जीवन जीने की शुरुआत भी नहीं कि है। जीवन मे असफल होने से ज्यादा असफ़लता के डर से जीवन की शुरुआत ही नही करना कितना दुखदायी हैं। हारने का डर आपको कभी भी जीत नही दिला सकता। जीत तभी मुमकिन है जब आप इस हारने के डर को हराते हो। दरअसल इस डर को जितना ही सही जीत हैं। डर को ख़तम करना ही जीत हासिल करने की पहली निशानी है। जब तक आप असफ़लता के डर से ख़ुद को बचाते रहेंगे तब तक आप जी रहे है ऐसा कहना भी गलत है।
एक बार इसे भूलकर काम करना शुरू कर दे आप आपने जीने के अंदाज़ से अचंभित रह जाएंगे। उस युवक की तरह आप जीवन के द्वारा दिये जाने वाले हर एक उपहार का हकदार बन जाएंगे। अपनी प्रतिभा और आपके भीतर निरन्तर प्रवाहित सकारात्मक वैश्विक ऊर्जा से परिचित हो जाएँगे।जीवन की कई सारी उपलब्धियों को सरलतापूर्वक हासिल कर पायेंगे। प्रकृति के द्वारा दिये गए सभी स्रोतों का सही इस्तेमाल कर पाएँगे। अपने अंदर स्थित असली पराक्रमी इंसान से मिलने मौका इस डर के उस पार ही होता हैं।
आप ख़ुद एक बार, क्या होंगा अगर हार गया तो?असफ़ल हो गया तो? ऐसा बोलकर काम सुरु करे; आप आनेवाले परिणामों से ख़ुश ही रहेंगे।अगर आप हारने की हिम्मत रखेंगे तो हर एक मुश्किल आसानी में बदल जाएंगी, जीत आपही की होंगी। इस डर को जहन से निकाल दीजिए और अपने लक्ष्य पर टूट पड़िये।
हारने के डर से, असफ़ल के डर से, कुछ नही करनेसे ज्यादा हारना, असफ़ल होना कई ज़्यादा क़ीमती हैं। महत्वपूर्ण है।
आइये दोस्तों इस डर को ही डराये,हराये और ज़िन्दा होने का अनुभव करें।
Let's dare to fail....
