मनःशांति
एक राजा अपनी अद्यात्मिक सोच की वज़ह से पूरे राज्यमें मशहूर था। वह प्रजाको भी अद्यात्मिक राह पर लाने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ करते रहता था। वह चाहता था कि हर एक इंसान सुखी और शांतिपूर्ण तरीकेसे जीवन बिताये। इसी कारणवश उसनें एक चित्रकारी प्रतियोगिता का आयोजन किया। जिसमे उसने ऐसा चित्र बनानेकी घोषणा की जिससे शांति प्रतीत हो, साथ ही जीतनेवाले को ढ़ेर सारा ईनाम देनेकी भी घोषणा की। राज्य के हर एक कोने तक यह बातें पहुंचायी गई। थोड़े ही दिनोंमें कई जानेमाने चित्रकारों ने अपनी अपनी तस्वीरें राजमहल की ओर भेज दी। राजा ने उन सभी तस्वीरों का प्रदर्शन लगाया और लोंगोंको देखनेके लिए निमंत्रित किया।
राजा ने अपने राजमहल की आर्ट गैलरी में सारी पेंटिंग्स लगायी थी। राज्य के हर एक हिस्से से लोग प्रदर्शन देखने आये थे। लोंगोंको वे सभी पेंटिंग्स अच्छी लगती थी। हर एक चित्र किसी ना किसी तरीकेसे शांति को प्रतीत कर रहा था। कई चित्रों में ध्यान करतें हुये साधुओं को चित्रित किया था। कईयों ने शांत बहती हुई नदी और विशाल समंदर को चित्रित किया था। कई चित्रों में प्रकृतिको प्रतिबिम्बित किया था। हर एक चित्र अच्छा था। उनमेंसे एक चित्र लेकिन हर एक को अच्छा लगा था। और लोंगोंको वहीं चित्र प्रतियोगिता जीतेगा ऐसा लगता था। उस चित्र में चित्रकारने एक शांत तालाब के किनारे एक हसीन और हिमसे लतपत पर्बत को चित्रित किया था। उस पर्बतपर कई सारे रंगों के पेड़ फूल थे। तालाब के किनारें भी हसीन और बड़े वृक्ष थे। उस हिमाच्छादित पर्बत का सुंदर प्रतिबिंब तालाब में पड़ा था। सारा माहौल शांतिपूर्ण था। चित्रित किया हुआ सारा परिसर गहन शांति को प्रतीत कर रहा था। उस चित्र को देख हर एक शांति का अनुभव कर रहा था। लोंगोंको पूरी गारंटी थी कि राजा इसी चित्र को विजयी चित्र घोषित करेगा।
दूसरे दिन सुबह सभी लोग राजमहल में प्रतियोगिता का परिणाम जानने के लिए उपस्थित हो गए। राजा भी प्रतियोगिता जीते हुए चित्र को लेकर वहां उपस्थित हुआ। राजा ने जैसे ही वह चित्र लोगोंके सामने रखा, लोग उस चित्र को देख आश्चर्य हुये। वह तो लोगोंकी अपेक्षासे बिल्कुल अलग था। राजा ने जो चित्र चुना था वह तो किसी भी प्रकार से शांति को प्रतीत नही कर रहा था। उस चित्र में चित्रकारने एक ऊँचा बंजर, वृक्षहिंन,रूखा पर्बत उतारा था। उपरसे उस पर्बत पर काले ढ़ग छाये हुए थे। उनमें भयावह बिजली चमक रही थी, मानो वह अभी किसी जो जलाकर राख कर रही थी। जोरों का तूफ़ान उठा था। तूफ़ान पर्बतपर जोरों से टकरा रहा था। साथ ही मूसलाधार वर्षा भी चल रही थी। लोग राजा का चुनाव देख परेशान हो गए। कइयोको लगा कि शायद राजाने गलतीसे इसे यहाँ पर लाया होंगा। लोगोंकी परेशानी राजाके ध्यान में आते ही उसने सभी को चित्र को फिर से पूरे ध्यान से देखने का आवाहन किया। जब सभी ने ध्यानसे चित्र को परखा तो उन्होंने कुछ ऐसा देखा जो सही में शांति के परम अनुभूति को प्रतीत कर रहा था। उस चित्र में खड़े रूखे पर्बतपर एक छोटा पेड़ था। कुछ ही टहनियों का और कुछही पत्तो का। उस पेड़ पर एक छोटासा कोसला था और उसमें दो चिड़िया थी। चिड़िया इतने बड़े तूफ़ान और घनी बारिश में भी पूरी तरह शांत दिखाई दे रही थी। उनके आसपास का माहौल बिल्कुल अशांत था, उसमे भयावहता कुटकूटकर भरी हुई थी। फिर भी दोनों चिड़िया खुदमे शांति का परम अनुभव कर रही थी। राजा ने लोगोंसे कहा कि शांति बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नही करती। परिस्थिति कितनीं भी मुश्किल और हिंसक क्यों न हो शांति का अनुभव अंदर से होना चाहिए।और यही एक कारण था जिसने इस चित्र को जीताया था। राजा की यह दृष्टि देख सभी प्रसन्न हुए और शांति का सही मतलब समझ कर चित्रकारकी कल्पकता की सराहना करने लगें।
हम सभी लोग मनःशांति की खोज बाहरी दुनियां में करतें हैं। हमारी शांति दूसरों की मनोदशा पर निर्भर होती हैं। हम परिस्थितियों के अधीन होते है ना कि परिस्थितिया हमारी अधीन होती हैं। हम शांति के खोज में पूरी दुनिया घूम आते है। चारों धाम की यात्रा पर निकलते हैं। नदी, तालाब,समंदर,पर्बत यहां तक की हिमालय की चोटी तक घूम आते हैं। फिर भी हमे शांति का अनुभव होना मुश्किल होता है क्योंकि शांति की खोज खुदके अंदर करनी चाहिए और वही हर कोई भूल करता है। हम लगातार शांति का माहौल ढूँढ़ते रहते है। कभी कभी आसपास का माहौल शांत होता है फ़िर भी हम शांति महसूस नही करतें क्योंकि शांति बाहर से अंदर की ओर नही, बल्कि अंदर से बाहर की ओर बहती हैं। उस प्रकारकी आंतरिक शांति को पाना हर एक के लिए मुमकिन है। लेकिन उसके लिए जीवन की तरफ सही रुख़ अपनाना जरूरी है। वास्तविक इस तरह की मनःशांति पाने के लिये हमें केवल हमारे बाहर उठे तूफान की ओर देखनेका सही दृष्टिकोण, सकारात्मक सोच और उदारता रखनी पड़ेंगी। हमे सजगतापूर्वक जीवन जीना होंगा।विपश्यना ध्यान और माइंडफुलनेस जैसी जीवन शांति को प्राप्त कर देनिवाली विद्याओं का अभ्यास करना पड़ेगा।हमसें होने वाली हर एक क्रिया तथा प्रतिक्रिया के पीछे केवल शांति को प्राप्त करनेका ही उद्देश्य होता है और जीवन की सार्थकता शांतिपूर्ण जीवन जीने में ही है।
आशा है कि आप ख़ुदमे शांति की खोज करेंगें क्योकि शांति आपको वहीं प्राप्त होंगी।
Let's dive into ourselves to get the peace.
EXCEL TRAINING SYSTEM.
Mr. Abhijeet Manav
Certified Mind Trainer,
NLP practitioner (NFNLP, U.S.A.)
Life skills coach,
Motivational speaker,
Corporate Trainer.
एक राजा अपनी अद्यात्मिक सोच की वज़ह से पूरे राज्यमें मशहूर था। वह प्रजाको भी अद्यात्मिक राह पर लाने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ करते रहता था। वह चाहता था कि हर एक इंसान सुखी और शांतिपूर्ण तरीकेसे जीवन बिताये। इसी कारणवश उसनें एक चित्रकारी प्रतियोगिता का आयोजन किया। जिसमे उसने ऐसा चित्र बनानेकी घोषणा की जिससे शांति प्रतीत हो, साथ ही जीतनेवाले को ढ़ेर सारा ईनाम देनेकी भी घोषणा की। राज्य के हर एक कोने तक यह बातें पहुंचायी गई। थोड़े ही दिनोंमें कई जानेमाने चित्रकारों ने अपनी अपनी तस्वीरें राजमहल की ओर भेज दी। राजा ने उन सभी तस्वीरों का प्रदर्शन लगाया और लोंगोंको देखनेके लिए निमंत्रित किया।
राजा ने अपने राजमहल की आर्ट गैलरी में सारी पेंटिंग्स लगायी थी। राज्य के हर एक हिस्से से लोग प्रदर्शन देखने आये थे। लोंगोंको वे सभी पेंटिंग्स अच्छी लगती थी। हर एक चित्र किसी ना किसी तरीकेसे शांति को प्रतीत कर रहा था। कई चित्रों में ध्यान करतें हुये साधुओं को चित्रित किया था। कईयों ने शांत बहती हुई नदी और विशाल समंदर को चित्रित किया था। कई चित्रों में प्रकृतिको प्रतिबिम्बित किया था। हर एक चित्र अच्छा था। उनमेंसे एक चित्र लेकिन हर एक को अच्छा लगा था। और लोंगोंको वहीं चित्र प्रतियोगिता जीतेगा ऐसा लगता था। उस चित्र में चित्रकारने एक शांत तालाब के किनारे एक हसीन और हिमसे लतपत पर्बत को चित्रित किया था। उस पर्बतपर कई सारे रंगों के पेड़ फूल थे। तालाब के किनारें भी हसीन और बड़े वृक्ष थे। उस हिमाच्छादित पर्बत का सुंदर प्रतिबिंब तालाब में पड़ा था। सारा माहौल शांतिपूर्ण था। चित्रित किया हुआ सारा परिसर गहन शांति को प्रतीत कर रहा था। उस चित्र को देख हर एक शांति का अनुभव कर रहा था। लोंगोंको पूरी गारंटी थी कि राजा इसी चित्र को विजयी चित्र घोषित करेगा।
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Very nice
ReplyDeleteAwesome story👌👍👍👍
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